नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। करीब तीन वर्षों के लंबे इंतजार के बाद मालवांचल के 914 गांवों तक नर्मदा का पानी पहुंचाने वाली 1275 करोड़ रुपये की नर्मदा-गंभीर समूह जल प्रदाय परियोजना अब अंतिम दौर में पहुंच गई है। जल निगम ने शेष कार्य को अगले ढाई महीने में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है।
अधिकारियों के अनुसार सितंबर के अंत तक पाइप लाइन, ट्रायल और तकनीकी परीक्षण पूरे कर अक्टूबर से नियमित जलापूर्ति शुरू कर दी जाएगी। ऐसा होने पर उज्जैन और इंदौर जिले के 914 गांवों के लाखों ग्रामीणों को पहली बार घर बैठे नर्मदा का शुद्ध पेयजल मिलेगा और हर गर्मी में गहराने वाले पेयजल संकट से स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है।
परियोजना के लगभग सभी प्रमुख ढांचागत कार्य पूरे हो चुके हैं। गंभीर बांध पर नया इंटेकवेल, झिरन्या में अत्याधुनिक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, मास्टर बैलेंसिंग रिजर्वायर (एमबीआर), इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन (आईपीएस), पंप हाउस तथा अधिकांश ऊंची पानी की टंकियां तैयार हैं। पिछले दिनों विभाग ने जल प्रवाह की टेस्टिंग भी शुरू कर दी थी।
अब मुख्य रूप से बची हुई पाइपलाइन जोड़ने, गांवों के वितरण नेटवर्क को अंतिम रूप देने और तकनीकी परीक्षण का काम किया जा रहा है। यह परियोजना सितंबर-2023 में शुरू हुई थी। चार महीने बाद 29 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका भूमिपूजन किया। निर्माण एजेंसी को 7 नवंबर 2025 तक परियोजना पूरी करनी थी, लेकिन जल शोधन संयंत्र, ग्रामीण पाइपलाइन, टंकियों के निर्माण और नर्मदा-शिप्रा बहुउद्देशीय परियोजना के साथ समन्वय जैसी वजहों से काम समय पर पूरा नहीं हो सका।
करीब एक वर्ष की देरी के बाद अब विभाग ने सितंबर-2026 का नया लक्ष्य तय किया है। योजना के तहत उज्जैन जिले के 830 और इंदौर जिले के देपालपुर विकासखंड के 84 गांवों सहित कुल 914 गांवों तक पेयजल पहुंचाया जाएगा। इनमें 354 गांवों में मध्यप्रदेश जल निगम स्वयं नई पाइपलाइन और वितरण व्यवस्था विकसित कर घर-घर नल कनेक्शन से पानी पहुंचाएगा। शेष गांवों में जल जीवन मिशन के तहत पहले से निर्मित टंकियों को नर्मदा जल से भरकर नियमित आपूर्ति की जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था स्थायी रूप से मजबूत होने का दावा किया जा रहा है।
गंभीर बांध पर बना है इंटकवेल
गंभीर बांध पर 20 मीटर गहरे और 14 मीटर व्यास वाले नए इंटेकवेल के माध्यम से नर्मदा का पानी उठाकर झिरन्या स्थित जल शोधन संयंत्र तक पहुंचाया जाएगा। यहां शुद्धिकरण के बाद पानी विभिन्न मास्टर बैलेंसिंग रिजर्वायर, पंपिंग स्टेशनों और टंकियों के जरिए गांवों तक पहुंचेगा।
अधिकारियों का कहना है कि परियोजना के सभी प्रमुख अवयव तैयार हैं और अब पूरा फोकस अंतिम कनेक्टिविटी तथा सिस्टम की विश्वसनीयता जांचने पर है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस परियोजना को लेकर उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। वर्षों से गर्मियों में टैंकर, हैंडपंप और अस्थायी जल स्रोतों पर निर्भर रहने वाले हजारों परिवार अब नलों से नियमित नर्मदा जल मिलने का इंतजार कर रहे हैं। यदि विभाग अपने नए लक्ष्य पर कायम रहता है तो इस बार सितंबर के अंत तक यह इंतजार समाप्त हो सकता है।
इन क्षेत्रों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ
- तराना – 206 गांव
- बड़नगर – 189 गांव
- खाचरौद – 176 गांव
- उज्जैन – 131 गांव
- घट्टिया – 128 गांव
- देपालपुर – 82 गांव
- सांवेर – 2 गांव
परियोजना एक नजर में
- लागत : 1275 करोड़ रुपये
- शुरुआत : सितंबर-2023
- भूमिपूजन : 29 फरवरी 2024, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- मूल लक्ष्य : 7 नवंबर 2025
- नया लक्ष्य : सितंबर-2026
- लाभ : 914 गांव (उज्जैन 830, इंदौर 84)
- प्रमुख संरचनाएं : इंटेकवेल, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, एमबीआर, आईपीएस, पंप हाउस और जल टंकियां
नई डेडलाइन पर टिकी ग्रामीणों की उम्मीदें
नर्मदा-गंभीर परियोजना नवंबर-2025 में पूरी होनी थी, लेकिन निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं होने से करीब एक वर्ष की देरी हो गई। अब विभाग ने ढाई महीने में काम पूरा करने का दावा किया है। सवाल यह है कि क्या इस बार बची पाइपलाइन, ट्रायल और तकनीकी खामियां तय समय में दूर हो जाएंगी, या फिर 914 गांवों के हजारों परिवारों का इंतजार एक बार फिर बढ़ेगा।

