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उज्जैन के महाकाल मंदिर में 2 मार्च को होलिका दहन, 3 मार्च को भस्म आरती में रंगोत्सव


3 मार्च को तड़के 4 बजे भस्म आरती में धुलेंडी पर रंगपर्व मनाया जाएगा, पुजारी, पुरोहित भगवान के साथ हर्बल गुलाल से होली खेलेंगे। इस दिन शाम को 6 बजकर 32 …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 26 Feb 2026 10:13:27 AM (IST)Updated Date: Thu, 26 Feb 2026 10:19:19 AM (IST)

बुधवार को संध्या आरती में किया गया भगवान महाकाल का विशेष शृंगार और मंदिर के शिखर की तस्वीर।

HighLights

  1. 2 मार्च को महाकाल मंदिर परिसर में होली का पूजन के बाद दहन किया जाएगा
  2. 3 मार्च को चंद्र ग्रहण के कारण शाम को शुद्धि के बाद होगी संध्या आरती
  3. भगवान का स्नान पूजन होगा तथा नैवेद्य लगाकर संध्या आरती की जाएगी

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में 2 मार्च को होलिका दहन होगा। 3 मार्च को तड़के 4 बजे भस्म आरती में रंगोत्सव मनेगा। पुजारी, पुरोहित हर्बल गुलाल से भगवान के साथ होली खेलेंगे। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण के कारण शाम को शुद्धि के बाद संध्या आरती होगी। मंदिर की प्राचीन परंपरा के अनुसार 2 मार्च को हर्षोल्लास के साथ होली मनाई जाएगी।

शाम को संध्या आरती में पुजारी भगवान महाकाल को गुलाल अर्पित करेंगे। आरती के बाद मंदिर परिसर में होली का पूजन उपरांत दहन किया जाएगा। अगले दिन 3 मार्च को तड़के 4 बजे भस्म आरती में धुलेंडी पर रंगपर्व मनाया जाएगा। पुजारी, पुरोहित भगवान के साथ हर्बल गुलाल से होली खेलेंगे। इस दिन शाम को 6 बजकर 32 मिनट से चंद्र ग्रहण रहेगा।

शाम को ग्रहण मोक्ष के बाद मंदिर को शुद्ध किया जाएगा

ऐसे में सुबह 6 बजकर 32 मिनट से ग्रहण का सूतक मान्य करते हुए सुबह 7.30 बजे बालभोग आरती तथा सुबह 10.30 बजे भोग आरती में भगवान को शकर का भोग लगाया जाएगा। शाम को 6 बजकर 46 मिनट पर ग्रहण मोक्ष के उपरांत मंदिर को धोकर शुद्ध किया जाएगा।

इसके बाद भगवान का स्नान पूजन होगा तथा नैवेद्य लगाकर संध्या आरती की जाएगी। बता दें महाकाल मंदिर की पूजन परंपरा में सुबह बाल भोग आरती में भगवान को दही चावल तथा नैवेद्य आरती में दाल चावल, रोटी सब्जी, मिष्ठान का नैवेद्य लगाया जाता है।



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