नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को जल्द ही सशुल्क हाईटेक डिजिटल लॉकर सुविधा मिलने वाली है। मंदिर प्रबंध समिति ने मोबाइल, जूता-चप्पल और बैगेज लाकर के डिजाइन, स्थापना, संचालन और रखरखाव के लिए निजी एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कहा गया है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद श्रद्धालुओं को लंबी कतारों और सामान की सुरक्षा की चिंता से काफी राहत मिलेगी। प्रस्ताव के अनुसार चयनित एजेंसी को पूरे प्रोजेक्ट की लागत स्वयं वहन करनी होगी। मंदिर समिति केवल स्थान उपलब्ध कराएगी, जबकि लाकर स्थापना, सॉफ्टवेयर विकास, संचालन, रखरखाव और तकनीकी सहायता का पूरा खर्च एजेंसी उठाएगी। इसके बदले एजेंसी मंदिर समिति के साथ राजस्व साझा करेगी।
विशेष क्यूआर कोड या ओटीपी मिलेगा
मंदिर समिति द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव के अनुसार पूरी व्यवस्था आधुनिक तकनीक पर आधारित होगी। श्रद्धालु मंदिर परिसर के बाहर या निर्धारित लाकर केंद्र पर पहुंचकर क्यूआर कोड स्कैन करेंगे, अपनी पसंद की भाषा चुनेंगे, मोबाइल नंबर दर्ज करेंगे और डिजिटल भुगतान कर लाकर प्राप्त कर सकेंगे। इसके बाद उन्हें एक विशेष क्यूआर कोड या ओटीपी मिलेगा, जिसकी मदद से वे अपना सामान वापस ले सकेंगे।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह व्यवस्था केवल सामान रखने तक सीमित नहीं होगी। इसके लिए वेब आधारित प्लेटफार्म, मोबाइल एप, ऑनलाइन भुगतान प्रणाली, क्लाउड आधारित प्रबंधन, रियल टाइम मॉनिटरिंग और प्रशासनिक डैशबोर्ड जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इससे मंदिर प्रशासन को हर लाकर, उसकी उपलब्धता, उपयोग और आय की जानकारी एक क्लिक पर मिल सकेगी।
मौजूदा समय में महाकाल मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सुरक्षा कारणों से मंदिर में मोबाइल फोन और कई अन्य वस्तुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध रहता है। ऐसे में श्रद्धालुओं को सामान रखने के लिए अलग-अलग व्यवस्थाओं का सहारा लेना पड़ता है। नई डिजिटल लॉकर प्रणाली लागू होने के बाद यह पूरी प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और सुरक्षित हो जाएगी।
शुल्क को लेकर फिलहाल सस्पेंस
महाकाल मंदिर में प्रस्तावित डिजिटल लाकर सुविधा का शुल्क कितना होगा, यह अभी तय नहीं है। निविदा दस्तावेज के अनुसार आधारभूत उपयोग शुल्क चयनित एजेंसी प्रस्तावित करेगी, लेकिन अंतिम मंजूरी मंदिर समिति के प्रशासक की होगी। समिति को शुल्क निर्धारित करने, उसकी अधिकतम सीमा तय करने, संशोधन करने और उसे नियंत्रित करने का अधिकार भी रहेगा।
मानकों का पालन करना होगा
ऐसे में मोबाइल, जूता-चप्पल और सामान रखने के लिए श्रद्धालुओं को कितना भुगतान करना होगा, यह निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। समिति ने इस नई व्यवस्था को हस्तांतरित करने के लिए कई महत्वपूर्ण शर्त रखी है। जैसे तय एजेंसी को 24 घंटे सेवा उपलब्ध करानी होगी तथा साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता, विद्युत सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे मानकों का पालन करना होगा।
दर्शन व्यवस्था सुविधाजनक बनेगी
इसके अलावा प्रत्येक लेन-देन का रिकार्ड सुरक्षित रखना, दैनिक बैकअप लेना और शिकायत निवारण प्रणाली संचालित करना भी अनिवार्य होगा। यदि यह परियोजना समय पर लागू होती है तो महाकाल मंदिर देश के उन चुनिंदा धार्मिक स्थलों में शामिल हो जाएगा, जहां श्रद्धालुओं को पूरी तरह डिजिटल और तकनीक-संचालित लॉकर सुविधा उपलब्ध होगी। इससे न केवल दर्शन व्यवस्था अधिक सुविधाजनक बनेगी, बल्कि मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता और आधुनिकता का एक नया अध्याय भी जुड़ जाएगा।

