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उज्जैन के मंदिरों का बनने जा रहा एकीकृत तीर्थ सर्किट, 11 धार्मिक परियोजनाओं को एक नेटवर्क में जोड़ने की तैयारी


नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : महाकाल दर्शन के बाद अब श्रद्धालु उज्जैन के दूसरे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक भी आसानी से पहुंच सकें, इसके लिए शहर के मंदिरों को अलग-अलग परियोजनाओं के बजाय एकीकृत तीर्थ-पर्यटन नेटवर्क के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

अर्बन चैलेंज फंड के तहत 1124.52 करोड़ रुपये के इंटीग्रेटेड टेंपल इकोसिस्टम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को प्रशासनिक एवं वित्तीय मंजूरी मिल चुकी है। योजना में मंदिर परिसरों के विकास के साथ पार्किंग, कमर्शियल स्पेस, श्रद्धालु सुविधाएं, विरासत संरक्षण और शिप्रा रिवरफ्रंट को एक-दूसरे से जोड़ने की परिकल्पना है।

इस एकीकृत विकास में कालभैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनि आश्रम, नवग्रह शनि मंदिर, 84 महादेव, अंगारेश्वर महादेव, भोग माता/ भूखी माता, गढ़कालिका माता, सिद्धवट और बगलामुखी माता मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को शामिल किया गया है। इनके साथ विराट रूप पर्यटन एवं पब्लिक एक्सपीरियंस जोन भी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस तरह धार्मिक स्थलों के विकास को केवल मंदिर परिसर तक सीमित न रखकर उनके आसपास के पूरे तीर्थ अनुभव को विकसित करने की तैयारी है।

बता दें कि उज्जैन की धार्मिक पहचान का सबसे बड़ा केंद्र महाकाल मंदिर है। जबकि शहर और आसपास के क्षेत्र में अलग-अलग धार्मिक परंपराओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण स्थल मौजूद हैं। वर्तमान में इन स्थलों की यात्रा अलग-अलग होती है। एकीकृत टेंपल इकोसिस्टम की अवधारणा इन्हें एक व्यापक धार्मिक-पर्यटन नेटवर्क में जोड़ने की है। इससे श्रद्धालु महाकाल के साथ कालभैरव, मंगलनाथ, सांदीपनि आश्रम, अंगारेश्वर, गढ़कालिका, सिद्धवट और अन्य प्रमुख स्थलों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। इसका सीधा असर शहर में श्रद्धालुओं के ठहराव और धार्मिक पर्यटन की अवधि पर पड़ सकता है।

मंदिर के साथ पार्किंग और बाजार भी

परियोजना की खासियत यह है कि मंदिरों के विकास के साथ पार्किंग और कमर्शियल स्पेस को भी योजना का हिस्सा बनाया गया है। प्रत्येक प्रमुख स्थल के आसपास सुविधाएं विकसित करने की परिकल्पना है, ताकि दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को वाहन खड़े करने, पूजा सामग्री लेने और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए अलग-अलग स्थानों पर भटकना न पड़े। मल्टीलेवल पार्किंग जैसी व्यवस्थाएं बनने से मंदिर क्षेत्रों में सड़क किनारे वाहनों के दबाव को कम करने में भी मदद मिल सकती है। कमर्शियल स्पेस में स्थानीय उत्पाद, प्रसाद और धार्मिक पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को व्यवस्थित जगह मिल सकेगी।

8 से 10 किमी शिप्रा रिवरफ्रंट भी जुड़ेगा

योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा करीब 8 से 10 किलोमीटर शिप्रा रिवरफ्रंट को धार्मिक पर्यटन के इस नेटवर्क से जोड़ना है। इससे मंदिर दर्शन के साथ घाट और नदी किनारे का अनुभव भी तीर्थ यात्रा का हिस्सा बन सकेगा। यानी भविष्य में उज्जैन का धार्मिक पर्यटन माडल मंदिर, शिप्रा, विरासत, पर्यटन, सार्वजनिक सुविधाओं के एक साथ जुड़े अनुभव के रूप में विकसित करने की कोशिश है।

1124 करोड़ का पैसा कहां से आएगा?

परियोजना का वित्तीय मॉडल भी महत्वपूर्ण है। योजना के लिए करीब 281.13 करोड़ रुपये केंद्रीय अनुदान, 200 करोड़ रुपये म्युनिसिपल बॉन्ड और करीब 643.39 करोड़ रुपये टर्म लोन से जुटाने का प्रस्ताव है। यूडीए द्वारा करीब 645 करोड़ रुपये के टर्म लोन के लिए ईओआई जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आ चुकी है। कमर्शियल स्पेस, पार्किंग और अन्य परियोजना आधारित आय को भविष्य में ऋण अदायगी से जोड़ने की परिकल्पना है। इस तरह मंदिर विकास को केवल सरकारी खर्च के बजाय रेवेन्यू जनरेटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के मॉडल से जोड़ने की कोशिश है।

विराट रूप बनेगा नया पर्यटन आकर्षण

यूनिटी माल के पीछे शिप्रा तट पर प्रस्तावित 151 फीट ऊंची भगवान श्रीकृष्ण की विराट स्वरूप प्रतिमा इस धार्मिक-पर्यटन नेटवर्क का बड़ा नया आकर्षण बन सकती है। इसके साथ पब्लिक एक्सपीरियंस जोन विकसित करने की योजना है। धार्मिक आस्था के साथ आधुनिक पर्यटन अनुभव जोड़ने के लिए लाइट एंड साउंड, प्रोजेक्शन मैपिंग, उद्यान और दर्शक सुविधाओं जैसी व्यवस्थाएं प्रस्तावित हैं।

सिंहस्थ में होगी मॉडल की पहली बड़ी परीक्षा

सिंहस्थ-2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित आवाजाही के बीच इस परियोजना की उपयोगिता और बढ़ जाएगी। यदि मंदिरों के बीच कनेक्टिविटी, पार्किंग, सार्वजनिक सुविधाएं और रिवरफ्रंट समय पर विकसित होते हैं तो श्रद्धालुओं का पूरा दबाव महाकाल क्षेत्र तक सीमित रखने के बजाय शहर के अन्य धार्मिक स्थलों तक भी फैलाया जा सकेगा।

इससे स्थानीय बाजार, होटल, परिवहन, भोजन और धार्मिक पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को भी लाभ मिलने की संभावना है। यानी 1124.52 करोड़ की योजना का लक्ष्य केवल मंदिरों का सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों को सड़क, पार्किंग, बाजार, शिप्रा और पर्यटन अनुभव के साथ जोड़कर एक ऐसा तीर्थ नेटवर्क तैयार करना है, जिसमें महाकाल के बाद श्रद्धालु की यात्रा शहर के दूसरे धार्मिक स्थलों तक स्वाभाविक रूप से आगे बढ़े।

एक नजर में धार्मिक सर्किट

  • कालभैरव मंदिर संरक्षण एवं समग्र विकास
  • मंगलनाथ मंदिर विकास एवं सौंदर्यीकरण
  • सांदीपनि आश्रम धार्मिक विरासत एवं परिसर विकास
  • नवग्रह शनि मंदिर मंदिर एवं परिसर विकास
  • 84 महादेव धार्मिक सर्किट विकास
  • अंगारेश्वर महादेव परिसर विकास
  • भूखी माता मंदिर एवं परिसर विकास
  • गढ़कालिका माता संरक्षण एवं विकास
  • सिद्धवट धार्मिक एवं पर्यटक सुविधाएं
  • बगलामुखी मंदिर परिसर विकास
  • विराट स्वरूप यूनिटी माल के पीछे नया धार्मिक-पर्यटन आकर्षण

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