श्यामू करीब 10 माह से चिकित्सकों की निगरानी में है, हाथी की स्वास्थ्य रिपोर्ट से वाइल्ड लाइफ हाई पॉवर कमेटी को अवगत करा दिया गया है। कमेटी जल्द ही जिल …और पढ़ें

HighLights
- वाइल्ड लाइफ हाई पॉवर कमेटी प्रशासन को देगी सूचना
- श्यामू करीब 10 माह से चिकित्सकों की निगरानी में है
- ज्वाइंट कोलेप्स होने के कारण उसके पैर मुड़ गए हैं और वह ज्यादा चल नहीं सकता है
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। सावन-भादौ मास में निकलने वाली सवारी में इस बार भगवान महाकाल श्यामू हाथी की सवारी नहीं कर सकेंगे। डॉक्टरों के अनुसार हाथी डीजेनेरेटिव जाइंट डिजीज से ग्रसित है। ज्वाइंट कोलेप्स होने के कारण उसके पैर मुड़ गए हैं और वह ज्यादा चल नहीं सकता है।
श्यामू करीब 10 माह से चिकित्सकों की निगरानी में है, हाथी की स्वास्थ्य रिपोर्ट से वाइल्ड लाइफ हाई पॉवर कमेटी को अवगत करा दिया गया है। कमेटी जल्द ही जिला प्रशासन को इसकी सूचना देगी।
ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में प्रतिवर्ष श्रावण-भाद्रपद मास में भगवान महाकाल की सवारी निकाली जाती है। भगवान महाकाल चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर तथा हाथी पर मनमहेश रूप में सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकलते हैं। बीते छह सात वर्ष से अवंतिकानाथ भगवान महाकाल श्यामू हाथी की सवारी कर रहे थे लेकिन इस बार श्यामू हाथी के सवारी में शामिल होने पर संदेह उत्पन्न हो गया है।
दो दिन पहले पन्ना टाइगर रिजर्व, वन मंडल इंदौर तथा पशु चिकित्सा विभाग की टीम इंदौर रोड सांईंनाथ कालोनी स्थित उस स्थान पर पहुंची थी, जहां श्यामू हाथी को पाला जा रहा है। टीम ने श्यामू हाथी के ब्लड सैंपल लेने की कोशिश की लेकिन हाथी मालिक व उनके परिवार ने इसका विरोध शुरू कर दिया। परिवार का कहना है कि हाथी स्वस्थ है, उन्हें केवल यहां से हटाने के लिए हाथी को बीमार बताया जा रहा है।
वन्यप्राणी आजीविका चलाने का जरिया नहीं
सीनियर वेटेनरी सर्जन व वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट डॉ. मुकेश जैन ने नईदुनिया से चर्चा में कहा कि श्यामू हाथी हड्डी और मसल्स की गंभीर बीमारी से ग्रसित है। वह सामान्य रूप से स्वस्थ्य है, लेकिन ज्वाइंट कोलेप्स होने के बाद उसे बचाया नहीं जा सकता है। पिछले दस महीने से वह बीमार है और चिकित्सकों की निगरानी में है। उस पर वजन लादना और लंबा पैदल चलाना खतरे से खाली नहीं है। इस बार भगवान महाकाल की सवारी में भी उसका उपयोग नहीं किया जा सकता है, क्योंकि वह दो तीन किलो मीटर से ज्यादा पैदल नहीं चल सकता है। वैसे भी वन्य प्राणी पालने के लिए है आजीविका चलाने के लिए नहीं। महावत केवल अपने परिवार की सोच रहा है, वन्य जीव की नहीं इसलिए इस प्रकार का व्यवहार कर रहा है।
रोबोटिक हाथी का करें उपयोग
राजाधिराज भगवान महाकाल के नगर भ्रमण के लिए अनादिकाल से पालकी और हाथी की परंपरा रही है। भगवान राजसी वैभव के साथ इन पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। डा.जैन ने बताया मंदिर की परंपरा को निभाने तथा वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए रोबोटिक हाथी का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि यह विषय आस्था का है, लेकिन वन्य प्राणियों की सुरक्षा व जीवन रक्षा के लिए इसे अपनाया जा सकता है। केरल के मंदिरों में पशु क्रूरता को रोकने के लिए रोबोटिक हाथियों का उपयोग किया जा रहा है।
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